उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mubarakbaad phulon ke liye aur Khaar par lanat

मुबारकबाद फूलों के लिए और ख़ार पर ला'नत

مبارک باد پھولوں کے لیے اور خار پر لعنت

शायर: Ujjawal Vashishtha10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मुबारकबाद फूलों के लिए और ख़ार पर ला'नत
अरे माली उसूलों पर तिरे किरदार पर ला'नत

जो हासिल है वही काफ़ी है बस मेरे गुज़ारे को
करूँ मैं शुक्रिया इस पार का उस पार पर ला'नत

वो जिस की दीद से आँखों की बीनाई चली जाए
तो उस हुस्न-ए-सरापा के है फिर दीदार पर ला'नत

हमारे ज़हर ने देखो यहाँ मंज़र बदल डाले
सपेरे ने कहा अजगर तिरी फुन्कार पर ला'नत

हिफ़ाज़त कर नहीं सकता है जो अपने क़बीले की
कोई कैसे नहीं भेजेगा उस सरदार पर ला'नत

किसी मज़लूम की ख़ातिर अगर ये उठ नहीं सकती
तो है फिर ज़ंग-आलूद आप की तलवार पर ला'नत

न तू ही है मिरे घर में न है तस्वीर ही तेरी
भला कैसे न भेजूँ फिर दर-ओ-दीवार पर ला'नत

समझदारी से अपनी रेस जीती एक कछुए ने
अरे ख़रगोश तेरी चाल पर रफ़्तार पर ला'नत

अगरचे साल के बावन दिनों उस से बिछड़ना है
तो फिर हर इक महीने के हर इक इतवार पर ला'नत

अगर लोगों में नफ़रत बाँटना है शायरी तेरी
तो ऐ 'उज्जवल' तिरी महफ़िल तिरे अशआ'र पर ला'नत