उर्दू शायरी · ग़ज़ल

agar kar len tera didar aankhen

अगर कर लें तिरा दीदार आँखें

اگر کر لیں ترا دیدار آنکھیں

शायर: Ujjawal Vashishtha5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अगर कर लें तिरा दीदार आँखें
तो अच्छी क्यों न हों बीमार आँखें

बरसने लगती हैं आँखें हमारी
तिरी गाती हैं जब मल्हार आँखें

अगर देखूँ तुझे तो कैसे देखूँ
मैं रख आया समुंदर पार आँखें

सज़ाएँ मिलती हैं हर बार मुझ को
ख़ताएँ करती हैं हर बार आँखें

तुम्हारी दीद को दो आँखें कम हैं
मुझे हों और भी दो चार आँखें