उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri chhuwan ki KHafi raushni se jal jata

तिरी छुवन की ख़फ़ी रौशनी से जल जाता

تری چھون کی خفی روشنی سے جل جاتا

शायर: Vikram5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी छुवन की ख़फ़ी रौशनी से जल जाता
बदन-चराग़ तिरी रौशनी से जल जाता

असीर-ए-ज़ब्त ये दिल आँसुओं का प्यासा था
हँसी से आती हुई रौशनी से जल जाता

शब-ए-फ़िराक़ अँधेरों में जलने वाला मैं
शब-ए-विसाल जली रौशनी से जल जाता

वो मिस्ल-ए-रात बुझा देती शम्स-ए-जान-ओ-दिल
मैं मिस्ल-ए-चाँद बुझी रौशनी से जल जाता

ये तो मैं हूँ जो तिरी रौशनी में भीगता हूँ
अगर तू होता इसी रौशनी से जल जाता