उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri chaukhaT pe rahne ka jo dil arman chhoDe

तिरी चौखट पे रहने का जो दिल अरमान छोड़े

تری چوکھٹ پہ رہنے کا جو دل ارمان چھوڑے

शायर: Nadeem Ajmal Adeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरी चौखट पे रहने का जो दिल अरमान छोड़े
परिंदा फूल के 'आरिज़ पे क्यों मुस्कान छोड़े

अभी मरने में दिन बाक़ी हैं सो जी चाहता है
भले तावान ले ले ये उदासी जान छोड़े

मुझे क्या आम के बाग़ों की बाबत पूछते हो
मुझे मुद्दत हुई है दोस्तो मुल्तान छोड़े

हमारे वास्ते इतनी मोहब्बत छोड़ जाना
परिंदों के लिए जितना समर दहक़ान छोड़े

जहाँ देखो वहीं आफ़त कोई उतरी हुई है
कहाँ ठहरे कोई जा कर कहाँ सामान छोड़े

अब उस की याद सीने से लगाए फिर रहा हूँ
जिसे बचपन में मिलने के बड़े इम्कान छोड़े

जहाँ की ख़ाक मुझ को नाम से पहचानती है
'अदीम' उस शहर को कैसे कोई वीरान छोड़े