उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dua ko hathon mein le kar ghuma ke chhoD diya

दु'आ को हाथों में ले कर घुमा के छोड़ दिया

دعا کو ہاتھوں میں لے کر گھما کے چھوڑ دیا

शायर: Nadeem Ajmal Adeem8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दु'आ को हाथों में ले कर घुमा के छोड़ दिया
कि जैसे मुझ को ख़ुदा ने बना के छोड़ दिया

अकेले रहते हो अच्छा है सच कहूँ उस ने
जिसे गले से लगाया लगा के छोड़ दिया

तुम्हारी याद जहाँ रक़्स करने वाली थी
ये दिल वहीं पे बिछाया बिछा के छोड़ दिया

हवा का क़र्ज़ चुकाने को घर के तिनकों पर
चराग़ मैं ने जलाया जला के छोड़ दिया

तिरे फ़क़ीर ने हर राह से गुज़रते हुए
ज़मीं से जिस को उठाया उठा के छोड़ दिया

मिरे नसीब पे जब दस्तख़त किए ग़म ने
ख़ुशी को दिल से उड़ाया उड़ा के छोड़ दिया

जहाँ रिहाई का मंज़र था इस कहानी में
किसी ने पर्दा गिराया गिरा के छोड़ दिया

'अदीम' कोई भी कांधा न था सहारे को
मुझे तो सब ने रुलाया रुला के छोड़ दिया