उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chamakti raushni ne mahtab band kar diya

चमकती रौशनी ने माहताब बंद कर दिया

چمکتی روشنی نے ماہتاب بند کر دیا

शायर: Nadeem Ajmal Adeem4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चमकती रौशनी ने माहताब बंद कर दिया
किसी ने चश्म-ए-तर में जैसे ख़्वाब बंद कर दिया

हमारी शाख़-ए-दिल से उस की याद टूटने लगी
हवा-ए-ग़म ने धूप का 'अज़ाब बंद कर दिया

हुजूम-ए-दोस्ताँ में उस ने हर किसी की बात की
हमारा नाम आया तो ख़िताब बंद कर दिया

'अदीम' काएनात भी 'अजीब दरस-गाह है
किसी ने जी लगाया तो निसाब बंद कर दिया