उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaisa dikhta hun agar waisa nahin

जैसा दिखता हूँ अगर वैसा नहीं

جیسا دکھتا ہوں اگر ویسا نہیں

शायर: Nadeem Ajmal Adeem8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जैसा दिखता हूँ अगर वैसा नहीं
मैं भी कोई आदमी अच्छा नहीं

आग सीने से उठी तो ये खुला
रौशनी के तन पे भी कुर्ता नहीं

वक़्त की गर्दन पे पाँव था मिरा
आदमी से बा-ख़ुदा झगड़ा नहीं

राज़ रक्खो यार का पानी भरो
ये घड़ा कच्चा तो है चिकना नहीं

झील में बहने लगी है चाँदनी
कौन कहता है यहाँ चश्मा नहीं

एक हसरत सी बंधी है शाख़ से
लहलहाते फूल का जूड़ा नहीं

चश्म-ए-तर ने एक दिन मुझ से कहा
आँख वो कासा है जो भरता नहीं

हम मोहब्बत साथ रखते हैं 'अदीम'
और यही सिक्का यहाँ चलता नहीं