उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ajab si baat nahin kah gaya madari kya

'अजब सी बात नहीं कह गया मदारी क्या

عجب سی بات نہیں کہہ گیا مداری کیا

शायर: Nadeem Ajmal Adeem8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'अजब सी बात नहीं कह गया मदारी क्या
'अदन से निकले हुए साँप को पिटारी क्या

वो अपना कांधा बढ़ाए तो याद आता है
उधार माँगी हुई नींद क्या ख़ुमारी क्या

वहाँ सदाएँ मुसलसल दुहाई देती हैं
यहाँ किसी को ज़रूरत नहीं हमारी क्या

ज़माना सुनता है रुक कर हमारी बातों को
हमारे सीने में आवाज़ है तुम्हारी किया

मिरा पड़ाव ज़ियादा नहीं ज़माने में
मिरी बला से ये होती है दुनिया-दारी क्या

सुना है तुम भी सताए हुए हो अपनों के
तुम्हारे वास्ते आई नहीं सवारी क्या

तमाम शहर में चीख़ें सुनाई देती हैं
किसी के हाथ यूँ ख़ंजर बने कटारी क्या

'अदीम' रात की दीवार का सहारा लिए
इसी तरह से गुज़ारोगे 'उम्र सारी क्या