उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere nasib mein duniya ka ek jhamela hai

तिरे नसीब में दुनिया का इक झमेला है

ترے نصیب میں دنیا کا اک جھمیلا ہے

शायर: Nadeem Malik13 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तिरे नसीब में दुनिया का इक झमेला है
'नदीम' कल भी अकेला था अब भी तन्हा है

मिरे रफ़ीक़ मिरे हम-सफ़र तुम्हारे लिए
ज़माने भर की मोहब्बत से खेल खेला है

ख़बर ये दी है मुझे आ के रास्तों ने अभी
उदास राह में लश्कर 'अदू का देखा है

गिरा के दर्द की मुझ पर चहार दीवारें
ये कौन है जो मुझे बार बार रोता है

किसी ने हाल न पूछा तुम्हारे बा'द कभी
तुम्हीं बताओ हमारा ये हाल कैसा है

बना रहा हूँ ख़ला पर मैं 'अक्स 'अक्स तुझे
दिखा रहा हूँ ज़माने को यार ऐसा है

ख़याल-ए-यार में सीने को चाक कर डाला
तुम्हारे बा'द यूँ ख़ुद को बहुत झिंझोड़ा है

बिछड़ते लम्हे की मजबूरियाँ तिरी सुन कर
यक़ीन मान कलेजे को अपने नोचा है

पहन के पाँव में ज़ंजीर इक हसीना ने
हमारे दिल में मोहब्बत का तीर मारा है

वो इंतिज़ार किया करता था मिरा पहरों
जो देख देख मुझे रहगुज़र बदलता है

तुम्हें भी देंगे ज़रूरत पड़े तो ले लेना
हमारे दिल के लहू से चराग़ जलता है

हुज़ूर आप की चाहत में शे'र कहते हैं
हमारा शजरा कहाँ शा'इरों से मिलता है

पिला के जाम मोहब्बत का मुझ को आज 'नदीम'
तिरे ख़याल ने औज-ए-फ़लक से फेंका है