उर्दू शायरी · ग़ज़ल

thirakte hathon dhaDakte sinon ko dekhta hun

थिरकते हाथों धड़कते सीनों को देखता हूँ

تھرکتے ہاتھوں دھڑکتے سینوں کو دیکھتا ہوں

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

थिरकते हाथों धड़कते सीनों को देखता हूँ
तमाशा बन कर तमाश-बीनों को देखता हूँ

किसान उम्मीद से मुझे देखते हैं हर रोज़
मैं सेम कल्लर लगी ज़मीनों को देखता हूँ

झगड़ते रहते हैं रात भर ख़ौफ़ ख़ामुशी ख़्वाब
मैं इक तरफ़ बैठता हूँ तीनों को देखता हूँ

थकन कमा कर पहुँचता हूँ घर के सहन तक और
फिर अपने कमरे को जाते ज़ीनों को देखता हूँ

मैं सात पचपन पे कार-ख़ाने पहुँच के दिन भर
मशीन पर मुंहमिक मशीनों को देखता हूँ

किसी पे कोई शिकन दिखे तो नहीं ठहरता
जहाँ भी जाता हूँ सब जबीनों को देखता हूँ

जगह किराया सहूलतें देखने से पहले
मैं इक नज़र लाज़िमन मकीनों को देखता हूँ