उर्दू शायरी · ग़ज़ल

teri kaman ke bas se bhi aage nikal gaya

तेरी कमाँ के बस से भी आगे निकल गया

تیری کماں کے بس سے بھی آگے نکل گیا

शायर: Habib.I.Kinkhabwala4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरी कमाँ के बस से भी आगे निकल गया
मैं 'इश्क़ में हवस से भी आगे निकल गया

अपनी तलाश में जो निकाला गया था पल
वो पल तो सौ बरस से भी आगे निकल गया

लुक्का-छुपी के वक़्त तुम्हारे ख़याल में
गिनने लगा तो दस से भी आगे निकल गया

है जिन की दस्तरस में ज़मीं और आसमाँ
मैं उन की दस्तरस से भी आगे निकल गया