उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is zamin-e-gham-e-judai par

इस ज़मीन-ए-ग़म-ए-जुदाई पर

اس زمین غم جدائی پر

शायर: Habib.I.Kinkhabwala6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस ज़मीन-ए-ग़म-ए-जुदाई पर
पाँव फिसलेंगे सब के काई पर

टूट के चाहने में यूँ टूटे
टूटता है बदन रिहाई पर

आप नाराज़ हो गए वर्ना
बात रुकती नहीं दुहाई पर

माना मुश्किल बढ़ाई है मैं ने
ज़िंदगी फिर से मुस्कुराई पर

कोई उम्मीद ही रही होगी
जी रहे हैं अगर दवाई पर

राह अपनी बदल नहीं देते
दोस्तों से हुई लड़ाई पर