उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kitni ajib baat hai tere bina mujhe

कितनी 'अजीब बात है तेरे बिना मुझे

کتنی عجیب بات ہے تیرے بنا مجھے

शायर: Habib.I.Kinkhabwala5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कितनी 'अजीब बात है तेरे बिना मुझे
हर चीज़ लुत्फ़ देने लगी है ज़रा मुझे

आख़िर गुनाह कर के दिखाना पड़ा मुझे
ये लोग तो समझने लगे थे ख़ुदा मुझे

तेरे लिए भी ग़ैब से आया है कोई क्या
जो तू भी कर रही है यूँ बे-आसरा मुझे

मरने की जुस्तुजू तो मुझे भी नहीं मगर
ज़ालिम ने दे दिया है तिरा वास्ता मुझे

मैं कौड़ियों के दाम पे आया हूँ बेच कर
सौदा ये 'इश्क़ का बड़ा महँगा पड़ा मुझे