उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere pyason ko saza di gai hai

तेरे प्यासों को सज़ा दी गई है

تیرے پیاسوں کو سزا دی گئی ہے

शायर: Aadil Farhat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे प्यासों को सज़ा दी गई है
तिश्नगी और बढ़ा दी गई है

उस के आने की ख़बर आते ही
शहर को आग लगा दी गई है

क़ैद होने की दुआ माँगी थी
मेरी ज़ंजीर हटा दी गई है

तुम मुझे देखने से क़ासिर थे
रौशनी और बढ़ा दी गई है

एक पंछी को किसी पिंजरे में
उड़ते रहने की दुआ दी गई है

ख़ुद-कुशी के तो निशाँ बाक़ी नहीं
रेत साहिल से हटा दी गई है

मैं तो सज्दे में पड़ा था लेकिन
मुझ पे तलवार गिरा दी गई है