उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main jal gaya tha jise rasta dikhate hue

मैं जल गया था जिसे रास्ता दिखाते हुए

میں جل گیا تھا جسے راستہ دکھاتے ہوئے

शायर: Aadil Farhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं जल गया था जिसे रास्ता दिखाते हुए
उसे तरस नहीं आया मुझे बुझाते हुए

तिरे विसाल से बेहतर तो हिज्र होता है
तिरे क़रीब मैं आता हूँ दूर जाते हुए

न-जाने कौन से कूज़ा-गरों के हाथ लगा
बहुत उधेड़ा गया है मुझे बनाते हुए

महक बदन से अभी तक नहीं गई उस की
वो जिस ने ख़ुशबू बिखेरी गले लगाते हुए

अजीब तरह की वहशत है मेरे चारों तरफ़
कि अब तो ख़्वाब भी डरते हैं मुझ तक आते हुए

मुझ ऐसे शख़्स को ज़ाएअ' किया गया 'फ़रहत'
भुला दी जैसे कोई शय कहीं छुपाते हुए