उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi kamal hua phir na is kamal ke baad

कोई कमाल हुआ फिर न इस कमाल के बा'द

کوئی کمال ہوا پھر نہ اس کمال کے بعد

शायर: Aadil Farhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई कमाल हुआ फिर न इस कमाल के बा'द
कि एक शख़्स न भाया तिरे विसाल के बा'द

उसे मलाल कि मैं ने उसे छुआ ही नहीं
मुझे मलाल कि उस ने कहा मलाल के बा'द

कभी भी इश्क़ जो करना तो सोच कर करना
ये तजरबा है मिरा यार अपने हाल के बा'द

बरहना रूह थी जब तक कोई तमाशा न था
ये सब शुरूअ हुआ एक ख़द्द-ओ-ख़ाल के बा'द

अजीब रंग दिखाए हैं इश्क़ ने तेरे
कि मैं उरूज पे आया मिरे ज़वाल के बा'द

तिरे विसाल से निकला तो हिज्र टूट पड़ा
मैं फिर से जाल में आया हूँ एक जाल के बा'द