उर्दू शायरी · ग़ज़ल

phuT kar roun na kyon main KHwab ki tabir par

फूट कर रोऊँ न क्यों मैं ख़्वाब की ता'बीर पर

پھوٹ کر روؤں نہ کیوں میں خواب کی تعبیر پر

शायर: Aadil Farhat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फूट कर रोऊँ न क्यों मैं ख़्वाब की ता'बीर पर
ख़ून के देखे हैं क़तरे आज फिर ज़ंजीर पर

एक मैं जो ना-तवाँ था 'इश्क़ करने के लिए
और वो रिसर्च पूरी कर चुका था 'मीर' पर

'इश्क़ मुझ पर इस तरह हावी हुआ है दोस्तो
जिस तरह तस्वीर गिरती है किसी तस्वीर पर

बेटियाँ तो इस लिए भी बे-वफ़ा हैं 'इश्क़ में
बाप की पगड़ी है भारी 'इश्क़ की तासीर पर

आज ख़ुद तक़दीर पर रोता हुआ देखा उसे
छोड़ कर मुझ को गया था जो मिरी तक़दीर पर