उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tawil ishq ki chahat thi muKHtasar na mila

तवील इश्क़ की चाहत थी मुख़्तसर न मिला

طویل عشق کی چاہت تھی مختصر نہ ملا

शायर: Om Awasthi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तवील इश्क़ की चाहत थी मुख़्तसर न मिला
हमारे जैसों को ये तोहफ़ा उम्र-भर न मिला

तमाम उम्र उलझता रहा मैं दुनिया से
समझ सके जो मुझे ऐसा हम-नज़र न मिला

उदासियाँ हैं फ़क़त अर्ज़-ए-दिल में फैली हुई
वो शाख़ हूँ मैं जिसे कोई भी समर न मिला

किसी के दिल में मुकम्मल क़ियाम करने को
कोई भी नुस्ख़ा मोहब्बत से कारगर न मिला