उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tari sukhe hue honTon pe aa jaane se kya hoga

तरी सूखे हुए होंटों पे आ जाने से क्या होगा

تری سوکھے ہوئے ہونٹوں پہ آ جانے سے کیا ہوگا

शायर: Aal-e-Raza Raza6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तरी सूखे हुए होंटों पे आ जाने से क्या होगा
बहुत तरसे हैं साक़ी एक पैमाने से क्या होगा

जो आँखें देखती रहती हैं झुटलाने से क्या होगा
नज़र तड़पा रही है दिल को बहलाने से क्या होगा

नशेमन की बिना रक्खी है कुछ तो सोच कर हम ने
चमा-चम बिजलियाँ हर-सू चमक जाने से क्या होगा

मोहब्बत ने कहा तैयार कर के पहला दीवाना
अभी लाखों बनेंगे एक दीवाने से क्या होगा

हज़ारों इंक़लाब-ए-दर्द हैं करवट से करवट तक
तड़पते ही रहो पहलू बदल जाने से क्या होगा

'रज़ा' देखो जो तुम उन की तरफ़ से दिल में कहते थे
तबीअ'त में ज़रा सा इंक़लाब आने से क्या होगा