उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tar hua dida-e-bina to ghazal bolegi

तर हुआ दीदा-ए-बीना तो ग़ज़ल बोलेगी

تر ہوا دیدۂ بینا تو غزل بولے گی

शायर: Jaani Lakhnavi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तर हुआ दीदा-ए-बीना तो ग़ज़ल बोलेगी
पैकर-ए-दर्द जो सिमटा तो ग़ज़ल बोलेगी

इतनी 'उजलत में नहीं चलता सुख़न का जादू
तुम कभी ग़ौर से सुनना तो ग़ज़ल बोलेगी

एक इक शे'र खिलेगा तो खिलेंगी ग़ज़लें
फ़ल्सफ़ा शे'र में होगा तो ग़ज़ल बोलेगी

मेरे लहजे से परेशानी है तुझ को सुन ले
मैं जो ख़ामोश रहूँगा तो ग़ज़ल बोलेगी

सोच पर क़ब्ज़ा है शोहरत का तो बोले कैसे
रंग ख़ल्वत का चढ़ेगा तो ग़ज़ल बोलेगी