उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dasht-o-sahra mein aab aana hai

दश्त-ओ-सहरा में आब आना है

دشت و صحرا میں آب آنا ہے

शायर: Jaani Lakhnavi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दश्त-ओ-सहरा में आब आना है
या'नी कोई सराब आना है

रोज़ ये सोच कर मैं सोता हूँ
आज तो उस का ख़्वाब आना है

मुझ को मा'लूम है मिरी क़िस्मत
मेरे हिस्से 'अज़ाब आना है

अब मैं जो चाहे पूछ लूँ उस से
क़ब्र से क्या जवाब आना है