उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek mehwar-e-jamal hue ja rahe hain hum

इक महवर-ए-जमाल हुए जा रहे हैं हम

اک محور جمال ہوئے جا رہے ہیں ہم

शायर: Jaani Lakhnavi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक महवर-ए-जमाल हुए जा रहे हैं हम
क्या पैकर-ए-ख़याल हुए जा रहे हैं हम

हासिल हुए जो ख़ुद को ज़रा वक़्त के लिए
अपने को भी मुहाल हुए जा रहे हैं हम

करने चले थे हम तिरी दुनिया से इक सवाल
दुनिया पे इक सवाल हुए जा रहे हैं हम

हर सम्त से ज़वाल ने घेरा है अब हमें
इस तरह ला-ज़वाल हुए जा रहे हैं हम

महफ़िल ये चाहती है कि 'जानी' न आएँ अब
महफ़िल के हम-ख़याल हुए जा रहे हैं हम