उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gardish mein paDe rahte guzare nahin hote

गर्दिश में पड़े रहते गुज़ारे नहीं होते

گردش میں پڑے رہتے گزارے نہیں ہوتے

शायर: Jaani Lakhnavi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गर्दिश में पड़े रहते गुज़ारे नहीं होते
गर 'इश्क़ के एहसान उतारे नहीं होते

अंधे भी बना लेते हैं तस्वीर सनम की
बीनाई पे मौक़ूफ़ नज़ारे नहीं होते

महरूमी का इक रंग ये भी होता है 'जानी'
मंसूब जो तुम से हैं तुम्हारे नहीं होते