उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chaar-su raqs-kunan hasrat-e-mismar ke sath

चार-सू रक़्स-कुनाँ हसरत-ए-मिस्मार के साथ

چار سو رقص کناں حسرت مسمار کے ساتھ

शायर: Jaani Lakhnavi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चार-सू रक़्स-कुनाँ हसरत-ए-मिस्मार के साथ
उम्र ढल जाए तिरी याद की दीवार के साथ

पहले आती है हुनर में किसी तासीर की बू
शायरी आती है फिर लहजा-ओ-गुफ़्तार के साथ

वो भी तो शहर-ए-तमन्ना से नहीं लौटे हैं
हम भी महफ़िल में हैं चुप क़ल्ब-ए-अज़ादार के साथ

चारागर मेरी तबीअत का बनाते हैं मज़ाक़
ये सुलूक अच्छा नहीं आप के बीमार के साथ

एक साया है तिरे क़द के बराबर कोई
चल रहा है जो मिरी हस्ती-ए-बेज़ार के साथ

इस लिए और किसी जल्वे पे आँखें न जमीं
जश्न-ए-बीनाई करेंगे तिरे दीदार के साथ