उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tamam ghar mein ujala bahaal karti hui

तमाम घर में उजाला बहाल करती हुई

تمام گھر میں اجالا بحال کرتی ہوئی

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तमाम घर में उजाला बहाल करती हुई
हवा के साथ मिरी रौशनी बिखरती हुई

उदासियों के कई रंग मुझ में भरती हुई
ख़िज़ाँ की शाम मिरी रूह में उतरती हुई

बदल न जाए बयाबाँ का जाँ-फ़ज़ा मंज़र
मिरी निगाह नए ज़ाविए से डरती हुई

हमारे सीने में तेज़ी से वक़्त चलता हुआ
हमारे पाँव के नीचे ज़मीं ठहरती हुई

त'अल्लुक़ात पे मँडराते अब्र छटते हुए
तिरी सदा से मिरी ख़ामुशी बिखरती हुई

ये एक रात जो खोले हुए है बाल अपने
सवाद-ए-शाम से निकली है बैन करती हुई