उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tariKH ke auraq se jab gard haTegi

तारीख़ के औराक़ से जब गर्द हटेगी

تاریخ کے اوراق سے جب گرد ہٹے گی

शायर: Nafees Ghazipuri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तारीख़ के औराक़ से जब गर्द हटेगी
सच्चाई के चेहरे पे नज़र भी तो पड़ेगी

सूली है अगर हक़ के लिए दौर-ए-ख़िरद में
तक़दीर-ए-जुनूँ पाँव को ज़ंजीर रहेगी

आता है तुम्हें ज़हर पिलाना तो पिलाओ
ये प्यास हमारी न बुझी है न बुझेगी

ये चाँद की किरनें ये हसीं रात का जादू
धड़कन अभी दिल की मिरे कुछ और बढ़ेगी

एहसास ने क़ुर्बत के जगा रक्खा है उतना
अब नींद भी शायद मिरी आँखों में चुभेगी

जब दूर नहीं मौसम-ए-गुल दौर-ए-ख़िज़ाँ से
ये ग़म की सियह रात सहर में भी ढलेगी

जाना है किधर कर लो 'नफ़ीस' अब ये त'अय्युन
कुछ दूर ही ये राहगुज़र साथ चलेगी