उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHush-rang parinde aae hain mausam par gulon ke sae hain

ख़ुश-रंग परिंदे आए हैं मौसम पर गुलों के साए हैं

خوش رنگ پرندے آئے ہیں موسم پر گلوں کے سائے ہیں

शायर: Nafees Ghazipuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुश-रंग परिंदे आए हैं मौसम पर गुलों के साए हैं
लो रक़्स को हम भी पाँव में ज़ंजीर पहन कर आए हैं

हर सम्त फ़ज़ा में हलचल है इक शोर बपा है गुलशन में
कुछ लोग क़फ़स से छूटे हैं कुछ तोड़ के ज़िंदाँ आए हैं

तारीकी फिर तारीकी है सुनते सुनते मिट पाएगी
कुछ दीप फ़सील-ए-शब पे मगर यारों ने आज जलाए हैं

इस दौर-ए-जहाँ में हम-‘असरो है फ़र्क़ बहुत इन दोनों में
वो ज़ख़्म जो तुम ने देखे हैं जो ज़ख़्म कि हम ने खाए हैं

वो सुब्ह के दरवाज़े से अभी इस शहर में दिन के आया है
फिर शाम के रूठे शहज़ादे को लोग मना कर लाए हैं

कुछ दाएरे दिल में लहरों के उठते हैं 'नफ़ीस' आख़िर क्यूँकर
इस झील के ठहरे पानी में पत्थर ये किधर से आए हैं