उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nind aankhon mein aaj kam-kam hai

नींद आँखों में आज कम-कम है

نیند آنکھوں میں آج کم کم ہے

शायर: Nafees Ghazipuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नींद आँखों में आज कम-कम है
फिर वही रत-जगों का मौसम है

दोस्ती दिल-दही वफ़ादारी
इन चराग़ों की लौ भी मद्धम है

फूल मुरझा रहे हैं 'आरिज़ के
मेरी आँखों में थोड़ी शबनम है

कौन उठ कर गया है सहरा से
क्यों ग़ज़ालों की आँख पुर-नम है

ज़ुल्फ़-ए-हस्ती सँवर न पाएगी
ज़ुल्फ़-ए-गीती बहुत ही बरहम है

दिन गुज़रने तो दो कुछ और 'नफ़ीस'
वक़्त सुनते हैं ख़ुद भी मरहम है