उर्दू शायरी · ग़ज़ल

daur-e-KHizan hai mausam-e-gul ke zawal tak

दौर-ए-ख़िज़ाँ है मौसम-ए-गुल के ज़वाल तक

دور خزاں ہے موسم گل کے زوال تک

शायर: Nafees Ghazipuri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दौर-ए-ख़िज़ाँ है मौसम-ए-गुल के ज़वाल तक
क़िस्सा हमारे हिज्र का लिखिए विसाल तक

बाँहों में बाँहें डाले हुए ख़्वाब की तरह
वो आए हम को छोड़ने शहर-ए-ख़याल तक

वो शाख़-ए-गुल है ख़ुशबू है या कोई लहर है
वो क्या है जिस की कोई नहीं है मिसाल तक

पहचान ही न पाए मुझे घर के लोग भी
धुँदला दिए थे वक़्त ने यूँ ख़द्द-ओ-ख़ाल तक

गर्दिश में जो ज़माने की हम से बिछड़ गए
मिलने के वो 'नफ़ीस' नहीं माह-ओ-साल तक