उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhon mein KHwab dil mein umid-e-sahar bhi hai

आँखों में ख़्वाब दिल में उमीद-ए-सहर भी है

آنکھوں میں خواب دل میں امید سحر بھی ہے

शायर: Nafees Ghazipuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखों में ख़्वाब दिल में उमीद-ए-सहर भी है
और सामने चराग़-ए-सर-ए-रहगुज़र भी है

रफ़्तार काएनात की कुछ तेज़-तर भी है
हो जाए हादिसा न कोई अब ये डर भी है

महवर पे अपने घूमे है रक़्क़ासा-ए-ज़मीं
साँसों के ज़ेर-ओ-बम का रुतों पर असर भी है

आओ पलट के चलते हैं फिर बज़्म-ए-यार में
क्या जा के छोड़ आए वहाँ कुछ ख़बर भी है

इस फ़स्ल-ए-गुल में ठहरा है मिलना किसी से जब
दर-पेश हम को दश्त-ए-जुनूँ का सफ़र भी है

क्यों छेड़िए सुरूद-ए-ग़म-ए-ज़ीस्त फिर 'नफ़ीस'
काँटों से बच के चलिए कि ऐसी डगर भी है