उर्दू शायरी · ग़ज़ल

taki dar aae yahan taza hawa chhoD diya

ताकि दर आए यहाँ ताज़ा हवा छोड़ दिया

تاکہ در آئے یہاں تازہ ہوا چھوڑ دیا

शायर: Maham Haya Safdar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ताकि दर आए यहाँ ताज़ा हवा छोड़ दिया
हम ने दानिस्ता दरीचों को खुला छोड़ दिया

कोई बैठा था अँधेरों से तकल्लुम के लिए
रात के हाथ पे इक ज़र्द दिया छोड़ दिया

हम ने तरमीम न की तर्ज़-ए-गदाई में कभी
कासा-ए-दिल तिरे दर पर ही रखा छोड़ दिया

हम ने रक्खे हैं त'अल्लुक़ तिरी मर्ज़ी के सदा
छोड़ देने का जिसे तू ने कहा छोड़ दिया

सैंकड़ों शिकवे थे यूँ भी तिरी क़ुर्बत में मुझे
दिल-नशीना तू ने अच्छा ही किया छोड़ दिया

आप के बा'द किसी से भी लगाया नहीं दिल
आप के बा'द तो है कार-ए-वफ़ा छोड़ दिया

उस मसीहा के लगाओ के तसद्दुक़ मैं 'हया'
जिस ने इक ज़ख़्म मिरे दिल का हरा छोड़ दिया