उर्दू शायरी · ग़ज़ल

surKH ruKHsar hasin honT ghazali aankhen

सुर्ख़ रुख़्सार हसीं होंट ग़ज़ाली आँखें

سرخ رخسار حسیں ہونٹ غزالی آنکھیں

शायर: Yasir Rampuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सुर्ख़ रुख़्सार हसीं होंट ग़ज़ाली आँखें
चाँद चेहरे पे क़यामत हैं ये काली आँखें

पहले कुछ ख़्वाब भी थे नींद भी थी अश्क भी थे
तू जुदा जब से हुआ हो गईं ख़ाली आँखें

होंट बेताब हैं उन सब के जवाबात लिए
मुझ से जो पूछती रहती हैं सवाली आँखें

ख़ैर चेहरा तो बना लूँगा मैं जैसे-तैसे
किस तरह उतरेंगी काग़ज़ पे ख़याली आँखें

अपने दुख से भी सिवा जिन को दिखे ग़ैर का दुख
ढूँड कर लाए कोई ऐसी मिसाली आँखें

क़ाबिल-ए-रश्क है उस शख़्स की क़िस्मत 'यासिर'
मिल गईं जिस को तुझे देखने वाली आँखें