उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jine ki thi jo dil mein tamanna wo mar gai

जीने की थी जो दिल में तमन्ना वो मर गई

جینے کی تھی جو دل میں تمنا وہ مر گئی

शायर: Yasir Rampuri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जीने की थी जो दिल में तमन्ना वो मर गई
तुम क्या गए कि 'इश्क़ की दुनिया बिखर गई

अल्लाह उस निगाह की तासीर क्या कहूँ
सीने को चीरती हुई दिल में उतर गई

बाब-ए-क़ुबूल पा न सकी मेरी एक आह
हर चंद लड़खड़ाती हुई दर-ब-दर गई

सीने पे उस ने दस्त-ए-हिनाई जो रख दिया
दिल की ज़मीन बू-ए-मोहब्बत से भर गई

आया न कुछ ख़याल तुझे सोचने के बा'द
देखा तुझी को हम ने जहाँ तक नज़र गई

किस दर्जा हौल-नाक था मंज़र हयात का
दहशत के मारे मौत मुझे देख डर गई

'यासिर' हुआ ये फ़ाएदा रोने से 'इश्क़ में
आँसू बहे तो चेहरे की रंगत निखर गई

कट ही न पाई एक ये ज़ालिम शब-ए-फ़िराक़
सौ बार हम पे आ के क़यामत गुज़र गई