उर्दू शायरी · ग़ज़ल

na hoga soz-e-dil shayad kisi surat bhi kam mera

न होगा सोज़-ए-दिल शायद किसी सूरत भी कम मेरा

نہ ہوگا سوز دل شاید کسی صورت بھی کم میرا

शायर: Yasir Rampuri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

न होगा सोज़-ए-दिल शायद किसी सूरत भी कम मेरा
मुझे आज़ाद कर अब ज़िंदगी घुटता है दम मेरा

ज़मीं धँस जाए झुक जाए फ़लक नाकाम हो दुनिया
उठाना चाहें गर मिल कर सभी ये बार-ए-ग़म मेरा

अगर चाहो तो सीना चाक कर के दिल दिखाता हूँ
बयाँ लफ़्ज़ों में हो सकता नहीं दर्द-ओ-अलम मेरा

असर होता है उल्टा हद से जब बढ़ने लगे कुछ भी
बढ़ा इतना कि आख़िर बन गया तस्कीन-ए-ग़म मेरा

क़दम रक्खा ही था उस शख़्स ने इस दिल की चौखट पर
ज़मीं से लग गया ता’ज़ीम में सर हो के ख़म मेरा

तुम्ही दुनिया थे मेरी तुम जो बिछड़े लुट गई दुनिया
उजड़ कर रह गया पल-भर में सब जाह-ओ-हशम मेरा

नसीहत सुन रहा हूँ शैख़ की बोतल पे नज़रें हैं
निगाहें सू-ए-मय-ख़ाना हैं रुख़ सू-ए-हरम मेरा

हज़ारों रास्ते तय कर के भी 'यासिर' मुसाफ़िर हूँ
न जाने कौन सी मंज़िल का ख़्वाहाँ है क़दम मेरा