उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ru-e-raushan ki tab ne mara

रू-ए-रौशन की ताब ने मारा

روئے روشن کی تاب نے مارا

शायर: Yasir Rampuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रू-ए-रौशन की ताब ने मारा
इक निखरते गुलाब ने मारा

कुछ तो मारे गए निगाहों से
बाक़ियों को नक़ाब ने मारा

सारा दिन याद ने डसा उन की
रात आई तो ख़्वाब ने मारा

ले के क़ासिद जो लौटा कुछ पुर्ज़े
ऐसे ख़त के जवाब ने मारा

मर गया ज़हर पी के इक मय-नोश
लोग समझे शराब ने मारा

कुछ जहाँ में न कर सका 'यासिर'
फ़िक्र-ए-रोज़-ए-हिसाब ने मारा