उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sharab-noshi hai din-raat shaghl-e-baada hai

शराब-नोशी है दिन-रात शग़्ल-ए-बादा है

شراب‌ نوشی ہے دن رات شغل بادہ ہے

शायर: Yasir Rampuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शराब-नोशी है दिन-रात शग़्ल-ए-बादा है
तबाह करने का ख़ुद को मिरा इरादा है

सजी है ‘आरज़ी मुस्कान तो लबों पे मगर
हमारी रूह पे ज़ख़्मों का इक लबादा है

अदाएँ जिस की क़यामत हैं चाल है काफ़िर
वो शख़्स देखने में हाए कितना सादा है

दुखों ने आ के बसा ली हैं बस्तियाँ कितनी
पता चला था मिरा दिल बहुत कुशादा है

तुम्हारे हुस्न का चर्चा है गर ज़माने में
हमारा 'इश्क़ भी मजनूँ से कुछ ज़ियादा है

बुतों की धुन में गुज़ारी थी ज़िंदगी 'यासिर'
ख़ुदा के नाम पे मरने का अब इरादा है