उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sukut-e-shab mein falak se mumasalat ke liye

सुकूत-ए-शब में फ़लक से मुमासलत के लिए

سکوت شب میں فلک سے مماثلت کے لئے

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सुकूत-ए-शब में फ़लक से मुमासलत के लिए
सियाह रंग चुना ख़्वाब-गह की छत के लिए

जो लोग रोते नहीं हैं बिखरने लगते हैं
बहुत ज़रूरी है नम ख़ाक की जड़त के लिए

दिखा रहे हैं वो ख़ुफ़िया सुरंगें फ़ातेह को
महल में छोड़ा था जिन को मुज़ाहिमत के लिए

न पूछ मुझ से तुझे मुख़्लिसाना मशवरा है
मैं ठीक शख़्स नहीं हूँ मुशावरत के लिए

न बोल-चाल का हिस्सा हैं अब न हाफ़िज़ों का
हम ऐसे तर्क-शुदा लफ़्ज़ हैं लुग़त के लिए

ज़बानी 'अह्द हुआ और लबों से मुहर लगी
मिला न जल्दी में जब कुछ लिखत-पढ़त के लिए

तमाम 'उम्र बुरी की है अपने साथ 'उमैर'
कोई तरीक़ा बता ख़ुद से मा'ज़रत के लिए