उर्दू शायरी · ग़ज़ल

suKHan to karte hain makkariyan nahin karte

सुख़न तो करते हैं मक्कारियाँ नहीं करते

سخن تو کرتے ہیں مکاریاں نہیں کرتے

शायर: Nadeem Malik5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सुख़न तो करते हैं मक्कारियाँ नहीं करते
कि दोस्तों से वफ़ादारियाँ नहीं करते

दिखाते रहते हैं अहबाब ज़िंदगी का निसाब
मगर निसाब से ग़द्दारियाँ नहीं करते

जलाए रखते हैं आँखों की पुतलियों पे चराग़
ये रौशनी पे अज़ादारियाँ नहीं करते

हमारा मसअला ये है कि हम मोहब्बत में
फ़रेब खाते हैं फ़न-कारियाँ नहीं करते

'नदीम' शहर के दीवार-ओ-दर की सुनते हैं
मगर किसी से रवा-दारियाँ नहीं करते