उर्दू शायरी · ग़ज़ल

subh se wajd mein aate hue hum

सुब्ह से वज्द में आते हुए हम

صبح سے وجد میں آتے ہوئے ہم

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सुब्ह से वज्द में आते हुए हम
हिज्र-त्यौहार मनाते हुए हम

रूह के दाइमी सन्नाटे में
जिस्म का साज़ बजाते हुए हम

मज़हका-खेज़ नज़र आते हैं
ख़ुद को आवाज़ लगाते हुए हम

तुझ को आगाह किया था हम ने
देख अब हाथ से जाते हुए हम

इक नए दश्त की यख़-बस्ता रात
आतिश-ए-कोहना जलाते हुए हम

कितने आसूदा नज़र आते हैं
आख़िरी दाँव लगाते हुए हम

फिर वही बज़्म-ए-सुख़न दिल्ली की
फिर वही शे'र सुनाते हुए हम