उर्दू शायरी · ग़ज़ल

soch kya is ka mila kya aur kya matlub tha

सोच क्या इस का मिला क्या और क्या मतलूब था

سوچ کیا اس کا ملا کیا اور کیا مطلوب تھا

शायर: Aal-e-Raza Raza5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सोच क्या इस का मिला क्या और क्या मतलूब था
ख़्वाब ही ठहरा तू जितनी देर देखा ख़ूब था

आग दे दे कर ब-हद्द-ए-आशियाँ ये इंतिक़ाम
तिनका तिनका क्यों किसी को इस क़दर महबूब था

वो निगाहों के पयाम और वो पयामों की बहार
देखिए मेरी तरफ़ वो भी ज़माना ख़ूब था

अब तो सौदा-ए-मोहब्बत है फ़क़त दीवानगी
वर्ना सौदा-ए-मोहब्बत का भी इक उस्लूब था

कब खुला उक़्दा 'रज़ा' जब कर चुके इज़हार-ए-शौक़
मुद्दआ' जाएज़ था हर्फ़-ए-मुद्दआ' मा'यूब था