उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sirf saya hi nahin panw mein rakkha hua hai

सिर्फ़ साया ही नहीं पाँव में रख्खा हुआ है

صرف سایہ ہی نہیں پاؤں میں رکھا ہوا ہے

शायर: Nadeem Najid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सिर्फ़ साया ही नहीं पाँव में रख्खा हुआ है
एक सूरज भी मिरी छाँव में रख्खा हुआ है

ये अलग बात कि मैं शहर-ज़दा हूँ लेकिन
बचपना अब भी मिरा गाँव में रख्खा हुआ है

दर-ब-दर ढूँढता फिरता है ज़माना जिस को
वो घना साया फ़क़त माओं में रख्खा हुआ है

कोई रिश्ता न सही कोई त'अल्लुक़ न सही
क्या ये कम है कि शनासाओं में रख्खा हुआ है

क्या करें बाँट लिया है ग़म-ए-दुनिया ने हमें
सर बचा है सो तिरे पाँव में रख्खा हुआ है