उर्दू शायरी · ग़ज़ल

silsila-war talluq ko nibhate hue hum

सिलसिला-वार त'अल्लुक़ को निभाते हुए हम

سلسلہ وار تعلق کو نبھاتے ہوئے ہم

शायर: Nadeem Najid4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सिलसिला-वार त'अल्लुक़ को निभाते हुए हम
तुझ तलक आ ही गए मिलते मिलाते हुए हम

अपनी आँखों को तिरे ताक़ में छोड़ आए हैं
ऐ हसीं शख़्स तिरे ख़्वाब से आते हुए हम

'आलम-ए-'इश्क़ में ख़ाक और ख़ुदा एक हुए
रात बरसात में इक साथ नहाते हुए हम

आख़िर-ए-कार तिरे दिल के क़रीं आ ही गए
सुर्ख़ फूलों की सी दीवार उठाते हुए हम