उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shor ek halqa-e-yaran mein sunai dega

शोर एक हल्क़ा-ए-याराँ में सुनाई देगा

شور ایک حلقۂ یاراں میں سنائی دے گا

शायर: Daniyal Haider Jafri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शोर एक हल्क़ा-ए-याराँ में सुनाई देगा
जब ज़माना मिरी उल्फ़त की गवाही देगा

अब तो उड़ने का हुनर भूल गए हैं पंछी
अब भला क्या उन्हें सय्याद रिहाई देगा

उस के दिल में तो कोई और मकीं है कब से
ख़ुद तलक वो न कभी मुझ को रसाई देगा

जानता हूँ कि वो बे-रह्म न बख़्शेगा मुझे
जानता हूँ वो मुझे दाग़-ए-जुदाई देगा

देखना हिज्र में उस के मैं मरूँगा इक दिन
मेरी मय्यत पे वो रो रो के दुहाई देगा

दिल तो दिल 'अक़्ल-ओ-ख़िरद पर भी है क़ब्ज़ा उस का
अब ब-जुज़ उस के भला कौन दिखाई देगा

एक ही शख़्स मगर वो भी ख़ुदा ने न दिया
हम तो समझे थे ख़ुदा हम को ख़ुदाई देगा

आज तन्हा हूँ मगर देखना इक दिन 'हैदर'
मेरी आवाज़ पे लब्बैक सुनाई देगा