उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shor-o-hangama-e-duniya se chhupa len tumko

शोर-ओ-हंगामा-ए-दुनिया से छुपा लें तुम को

شور و ہنگامۂ دنیا سے چھپا لیں تم کو

शायर: Vibha Jain 'Khwaab'5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शोर-ओ-हंगामा-ए-दुनिया से छुपा लें तुम को
जी में आता है कि सीने से लगा लें तुम को

कब से इस ताक में बैठे हैं कि इक लम्हा भी
मुँह उधर फेर ले दुनिया तो चुरा लें तुम को

हद से बढ़ जाए अगर 'इश्क़ तो है पागलपन
सो मुनासिब है कि अब ख़ुद से बचा लें तुम को

मेरी क़िस्मत नहीं लेकिन हो अमानत मेरी
जिन की क़िस्मत हो उन्हें कहना सँभालें तुम को

एक मुद्दत से है आबाद तुम्हारे दम से
दिल से चाहें भी तो अब कैसे निकालें तुम को