उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shohraten de izzaten de taliyan de shairi

शोहरतें दे 'इज़्ज़तें दे तालियाँ दे शा'इरी

شہرتیں دے عزتیں دے تالیاں دے شاعری

शायर: Deepak Kamil8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शोहरतें दे 'इज़्ज़तें दे तालियाँ दे शा'इरी
हाँ मगर इस से भी पहले रोटियाँ दे शा'इरी

इस जहाँ में प्यार को मिलता नहीं है प्यार ही
मेरे लहजे में बला की तल्ख़ियाँ दे शा'इरी

वाक़'ई जो नाम-लेवा हैं तिरे संसार में
कम से कम उन को तो मत गुम-नामियाँ दे शा'इरी

कब तलक देखें यहाँ देखी दिखाई ज़िंदगी
ज़िंदगी में नित नई हैरानियाँ दे शा'इरी

अब के भी त्यौहार पर वो शे'र ही सुन रो पड़ी
कान में बेटी के अब के बालियाँ दे शा'इरी

जिन चराग़ों ने तिरा घर रौशनी से भर दिया
उन को उजरत में भला क्यूँ आँधियाँ दे शा'इरी

जिन से तेरी महफ़िलें आबाद हैं शादाब हैं
उन को तोहफ़े में न यूँ बर्बादियाँ दे शा'इरी

वाक़'ई 'कामिल' बनाना चाहती है गर मुझे
तो मुझे ज़ख़्म-ए-हुनर की सीपियाँ दे शा'इरी