उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jangalon ka sahilon ka wadiyon ka kya karen

जंगलों का साहिलों का वादियों का क्या करें

جنگلوں کا ساحلوں کا وادیوں کا کیا کریں

शायर: Deepak Kamil7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जंगलों का साहिलों का वादियों का क्या करें
जब मज़ा है रास्तों में मंज़िलों का क्या करें

आदमी का क्या करें ये सोचती हैं 'औरतें
आदमी ये सोचते हैं 'औरतों का क्या करें

ज़िंदगी का आइना जब हर घड़ी हो सामने
घर में रख कर हम भला फिर आइनों का क्या करें

हम भी औरों की तरह महफ़ूज़ जी लेते मगर
क्या करें हम क्या करें इन हौसलों का क्या करें

'आदतन कर ही दिया हम ने तो उन का ज़िक्र फिर
दिल को तो हम रोक लें पर 'आदतों का क्या करें

दोस्ती को छोड़ कर हर काम यारों ने किया
आप ही बतलाईए इन दोस्तों का क्या करें

आप क्यूँ करते नहीं हैं करने वाले काम को
आप की 'कामिल' इन्हीं हम ग़फ़लतों का क्या करें