उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghar se tanha jo hum chale aae

घर से तन्हा जो हम चले आए

گھر سے تنہا جو ہم چلے آئے

शायर: Deepak Kamil7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घर से तन्हा जो हम चले आए
तब समझ में ये रास्ते आए

कौन महफ़िल में देखता हम को
जो भी आए तिरे लिए आए

क्या कहा ख़ाक में मिला देंगे
जाइए जाइए बड़े आए

घर के इन मसअलों को शर्म नहीं
काम पर साथ ही चले आए

जो छुपे रहते तो ही अच्छा था
क्यों मनाज़िर ये सामने आए

दिल-ए-बर्बाद की क़सम यारो
वाक़'ई 'इश्क़ में मज़े आए

आने वालों के भेस में 'कामिल'
जाने वाले यहाँ चले आए