उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chalo ab rasta badlen yahan se

चलो अब रास्ता बदलें यहाँ से

چلو اب راستہ بدلیں یہاں سے

शायर: Deepak Kamil6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चलो अब रास्ता बदलें यहाँ से
उतर आएँ ज़मीं पर आसमाँ से

मैं जितना दास्ताँ को लिख रहा हूँ
बिछड़ता जा रहा हूँ दास्ताँ से

मुक़द्दर की कमी मेहनत से भर दी
मोहब्बत की कमी भर दूँ कहाँ से

ज़रा सा होश हो तो मुश्किलों में
निकल आते हैं रस्ते दरमियाँ से

हँसाने वाले जो तन्हा मिले तो
बिखर कर रो पड़े चेहरे रुआँसे

परेशानी है उन की लफ़्ज़-ए-'कामिल'
मिटाएँ कैसे उस को दास्ताँ से