उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chalne do jaise chalti hai bahti hui hawa

चलने दो जैसे चलती है बहती हुई हवा

چلنے دو جیسے چلتی ہے بہتی ہوئی ہوا

शायर: Deepak Kamil5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चलने दो जैसे चलती है बहती हुई हवा
साँसें उखाड़ देती है ठहरी हुई हवा

उन के हुनर का शोर भी क़ाबिल है दाद के
जिन को मिली नसीब में सहमी हुई हवा

इस से वफ़ा की छोड़ दें उम्मीद आप भी
इस की हुई न ये कभी उस की हुई हवा

चुप सी खड़ी हवा को न आँखें दिखाइए
पगड़ी उछाल देगी ये बिगड़ी हुई हवा

बेहद ख़ुशी से काटिए पेड़ों को आप तो
देखी नहीं है आप ने जलती हुई हवा