उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shikayat kar ke ghussa aur un ka tez karna hai

शिकायत कर के ग़ुस्सा और उन का तेज़ करना है

شکایت کر کے غصہ اور ان کا تیز کرنا ہے

शायर: Nadir Kakorvi3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शिकायत कर के ग़ुस्सा और उन का तेज़ करना है
अभी तो गुफ़्तुगू-ए-मस्लहत-आमेज़ करना है

ये दुनिया जा-ए-आसाइश नहीं है आज़माइश है
यहाँ जो सख़्तियाँ तुझ पर पड़ीं अंगेज़ करना है

ग़ज़ल-ख़्वानी को तू इस बज़्म में आया नहीं 'नादिर'
तुझे याँ वाज़ कहना पंद-ए-सूद-आमेज़ करना है